वृंदावन परिक्रमा  (Vrindavan Parikrama ) पूरी जानकारी | और परिक्रमा मार्ग-वृंदावन ( Parikrama Marg Vrindavan )

Parikrama

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नम्र निवेदन आप सभी से 

वृंदावन की परिक्रमा के बारे में जानने से आपको यह  बात अवश्य जान लेनी चाहिए भारतीय संस्कृति समय-समय पर हमें अध्यात्म से जोड़ने की बात करती है। अध्यात्म हमारे मन को पवित्र करता है और हमें जीवन में हर कठिनाई से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है ताकि हम अपने जीवन को प्रेम से जी सकें। वृंदावन परिक्रमा भक्त और भगवान से जुड़ी हुई परिक्रमा है। सनातन धर्म में सभी को वृंदावन की परिक्रमा के बारे में अवश्य जान लेना चाहिए ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को ठाकुर जी के वृंदावन के बारे म बता सके।  वृंदावन के पवित्र स्थानों की परिक्रमा करना  श्रद्धालुओं का वृन्दावन आना और परिक्रमा करना है ।  वृंदावन की परिक्रमा करने के लिए तीन घंटे का समय लगता है । वृंदावन का परिक्रमा मार्ग 10 किमी (3 कोस और 1 किलोमीटर ) लम्बा है। रास्ते में आने वाले कुछ स्थानों कालिया घाट, मदन मोहन मन्दिर, इमली तला, श्रृंगार वट, और केशी घाट,यमुना जी के किनारे, फिर केशी घाट से धीर समीर, टटिया स्थान आदि स्थानों दर्शन प्राप्त होंगे ।

वृंदावन परिक्रमा क्या है ?

वृंदावन की  परिक्रमा को पंचकोसी परिक्रमा के नाम से जाना जाता है। वृंदावन की परिक्रमा भक्तों के लिए वर्दान है जिसमे बिहारी जी का प्रेम और राधा रानी का दुलार दोनों ही शामिल है। पूरा वृन्दावन भगवान् श्री कृष्णा और श्री राधा कृष्ण की दिव्य प्रेम और उनकी  की बाल लीलाओ से भरा हुआ है। वृंदावन में गोपियों और ग्वाल वाल के साथ भगवान् श्री कृष्णा ने बचपन में क्रीड़ा ( बाल लीलाएं ) की थी वृनदावन के मंदिर भगवान् श्री कृष्ण की लीलाओं के प्रतीक है । वृन्दावन के किसी भी प्रसिद्द स्थान से परिक्रमा शुरू करे और वृन्दावन श्री कृष्णा की लीला और दर्शनीय स्थानों के मार्ग पे चलकर वापस उसी स्थान पे आ जाता है। यही पंचकोसी परिक्रमा है। इसे युगल सरकार या साक्षात् राधा कृष्ण की परिक्रमा कहते है।

वृंदावन परिक्रमा मार्ग:-

वृंदावन परिक्रमा बिहारी जी मंदिर या कालिया घाट से शुरू कर सकते है। अगर आपको परिक्रमा शुरू करने सही स्थान समझ नहीं आये तो आप वृन्दावन के किसी संत या या वहां के निवासी से जान सकते है । वृंदावन में सभी संत आपको बहुत ही सरल स्वभाव के मिलेंगे । यमुना जी के तट पर मदन टेर, कालिया घाट, मदना मोहना मंदिर, इमली ताला, श्रृंगार वट, और केशी घाट, यमुना महारानी, फिर शेष घाट से टटिया स्थन आदि।

वृंदावन की परिक्रमा में आपको महत्वपूर्ण मंदिर, घाट,और वन परिक्रमा मार्ग में देखने को मिलेंगे।

कृष्ण बलराम मंदिर

गौतम ऋषि का आश्रम

वराह घाट

मोहना टेर

कालिया घाट

मदन मोहन मंदिर

इमली ताल

श्रृंगारा वट

केशी घाट

टेकरी रानी मंदिर

परिक्रमा के समाप्त होने पर ,यमुना  जी के तट पर  दीपक जलाए जाते है और  दीपक प्रार्थना की जाती है।

परिक्रमा के नियम:

वृंदावन की परिक्रमा करते समय हर एक पग श्री कृष्ण को श्री राधे नाम जाप करते हुए करनी चाहिए।

अगर आप कर सकते तो परिक्रमा नंगे पांव करें।

राधे राधे नाम का जितना हो सके उच्चारण करे।

परिक्रमा करते समय खाना नहीं  खाना चाहिए

वृंदावन परिक्रमा के लाभ क्या है ?

राधे -कृष्ण के चरणों की भक्ति प्राप्त होती है। वृन्दावन की परिक्रमा करने से जो भी आपकी मनो कामना है वो पूर्ण होती है।

वृंदावन की परिक्रमा अवश्य करें और बिहारी जी के दर्शन अवश्य करें

भविष्य पुराण में वृंदावन की परिक्रमा को पांच कोस की बताया गया है। वृंदावन की परिक्रमा साढ़े 3 कोस की है। यह परिक्रमा नंगे पांव करना जरूरी है। नंगे पैर परिक्रमा करने से आपको इसका फल प्रेम रूप में प्राप्त होता है।

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